हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले मंगलवार सुबह राजनीतिक माहौल गरमा गया। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायकों ने सदन के बाहर जोरदार प्रदर्शन करते हुए राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए विपक्षी सदस्य पेट्रोल-डीजल पर प्रस्तावित सेस, बढ़ते महंगाई दबाव और सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर अपनी नाराजगी जताते नजर आए। प्रदर्शन के दौरान विधानसभा परिसर के बाहर कुछ देर के लिए माहौल काफी तीखा हो गया और विपक्ष ने सरकार पर आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने का आरोप लगाया।
बीजेपी विधायकों ने कहा कि सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त सेस लगाने का प्रस्ताव सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर असर डालेगा। उनका कहना था कि पहले से ही महंगाई के कारण जनता परेशान है और ऐसे समय में ईंधन पर नया सेस लगाना जनता के साथ अन्याय है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी वित्तीय कमियों को पूरा करने के लिए लोगों पर नए-नए कर थोप रही है, जो किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। प्रदर्शन के दौरान कई विधायकों ने तख्तियों पर “महंगाई बंद करो”, “जनता पर टैक्स का बोझ क्यों” और “ईंधन सेस वापस लो” जैसे नारे लिखे हुए थे।
विपक्ष ने यह भी कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ेगा, जिससे रोजमर्रा की वस्तुएं भी महंगी हो जाएंगी। उनका तर्क था कि राज्य सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए वैकल्पिक उपाय खोजने चाहिए, न कि सीधे जनता पर बोझ डालना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान कुछ विधायकों ने विधानसभा के मुख्य द्वार के पास धरना देने की कोशिश की, हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के चलते उन्हें निर्धारित क्षेत्र में ही रोका गया। इसके बावजूद विपक्ष ने सरकार के खिलाफ अपना विरोध जारी रखा और चेतावनी दी कि यदि सेस का प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो सदन के भीतर भी इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।
सुखविंदर सरकार के फैसले पर बढ़ा राजनीतिक टकराव
विपक्ष के इस प्रदर्शन से साफ संकेत मिल रहे हैं कि बजट सत्र के दौरान सदन में जोरदार बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। बीजेपी विधायकों ने कहा कि वे इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगेंगे और जनता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के साथ उठाएंगे। उनका कहना था कि राज्य की आर्थिक स्थिति का हवाला देकर सरकार नए कर लगाने की कोशिश कर रही है, जबकि खर्चों पर नियंत्रण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
उधर, सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि प्रस्तावित सेस राज्य के राजस्व को मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने के लिए आवश्यक है।
सुखविंदर सरकार का तर्क है कि अतिरिक्त संसाधनों के बिना बुनियादी ढांचे, सामाजिक योजनाओं और अन्य विकास कार्यों को गति देना मुश्किल हो सकता है। हालांकि विपक्ष इस दलील से सहमत नहीं है और उसका कहना है कि सरकार को पहले खर्चों में पारदर्शिता लानी चाहिए। बजट सत्र से पहले हुए इस विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सदन के भीतर इस मुद्दे पर कैसी बहस होती है और सरकार विपक्ष की आपत्तियों का किस तरह जवाब देती है। माना जा रहा है कि पेट्रोल-डीजल सेस का मुद्दा पूरे सत्र के दौरान प्रमुख राजनीतिक विवाद का कारण बना रह सकता है, जिससे सदन की कार्यवाही भी प्रभावित होने की संभावना है।

