दुनिया इस वक्त एक भीषण युद्ध के दौर से गुजर रही है और इसका असर अब सीधे आम लोगों की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार को हिला कर रख दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिसके चलते भारत में भी पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर असर दिखने लगा है। हालांकि इस मुश्किल समय में केंद्र सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए साफ किया है कि सामान्य पेट्रोल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, तेल कंपनियों ने केवल प्रीमियम पेट्रोल के दामों में करीब 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले डीजल (इंडस्ट्रियल डीजल) के दामों में भी इजाफा किया गया है, जिससे औद्योगिक सेक्टर पर लागत का दबाव बढ़ सकता है। यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण की गई है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि प्रीमियम पेट्रोल की हिस्सेदारी कुल बिक्री में महज 3 से 4 प्रतिशत है, इसलिए इसका व्यापक असर आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा।
प्रीमियम पेट्रोल सामान्य पेट्रोल की तुलना में ज्यादा शुद्ध और उच्च ऑक्टेन नंबर वाला ईंधन होता है
प्रीमियम पेट्रोल सामान्य पेट्रोल की तुलना में ज्यादा शुद्ध और उच्च ऑक्टेन नंबर वाला ईंधन होता है। इसमें विशेष एडिटिव्स मिलाए जाते हैं, जो इंजन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाते हैं और नॉकिंग को कम करते हैं। यह खासतौर पर हाई-परफॉर्मेंस और लग्जरी गाड़ियों के लिए उपयोग किया जाता है, जबकि आम वाहनों के लिए सामान्य पेट्रोल ही पर्याप्त होता है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पूरी तरह डीरेगुलेटेड हैं। यानी इनकी कीमतें बाजार के उतार-चढ़ाव के अनुसार तय होती हैं और तेल विपणन कंपनियां इन्हें समय-समय पर संशोधित करती रहती हैं। ऐसे में प्रीमियम पेट्रोल, इंडस्ट्रियल डीजल के दामों में वृद्धि वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप सामान्य प्रक्रिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आम जनता को राहत देने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि फिलहाल सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसे स्थिर रखने की पूरी कोशिश की जा रही है। एलपीजी गैस को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ की है। मंत्रालय ने बताया कि देश में रसोई गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और किसी भी तरह की कमी नहीं है। मांग को देखते हुए घरेलू उत्पादन को बढ़ाया गया है, जिससे आपूर्ति सुचारु बनी हुई है। सरकार के अनुसार, हाल के दिनों में घबराहट में गैस बुकिंग करने की प्रवृत्ति में कमी आई है। फिलहाल देशभर में हर दिन करीब 55 लाख एलपीजी सिलेंडर की रीफिल बुकिंग हो रही है, जो सामान्य स्थिति को दर्शाती है। इसके अलावा, पिछले एक सप्ताह में 11,300 टन कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई की गई है, जिससे बाजार में संतुलन बना हुआ है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में हो रहे बदलावों का असर देश के भीतर भी दिखता है। इसके बावजूद सरकार लगातार हालात को नियंत्रित रखने के लिए रणनीतिक कदम उठा रही है।
एलपीजी सप्लाई मजबूत रखने के लिए सरकार की तैयारी, पीएनजी को बढ़ावा
एलपीजी की मांग को संतुलित करने के लिए सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं। अधिकारियों के अनुसार, अब तक 13,700 से अधिक नए पीएनजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जिससे रसोई गैस पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है। इसके साथ ही करीब 7,500 उपभोक्ता एलपीजी से पीएनजी की ओर शिफ्ट हो चुके हैं। सरकार का मानना है कि पीएनजी के विस्तार से न केवल एलपीजी पर दबाव कम होगा, बल्कि शहरी क्षेत्रों में गैस की निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित होगी। आने वाले समय में पीएनजी नेटवर्क को और विस्तारित करने की योजना बनाई जा रही है। एलपीजी सप्लाई को सुचारु बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को भी सख्त निर्देश दिए हैं। वितरण व्यवस्था पर नजर रखने और किसी भी तरह की कालाबाजारी या जमाखोरी को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। ईरान से तेल आयात को लेकर पूछे गए सवाल पर अधिकारियों ने फिलहाल कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इस विषय पर कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगी। वहीं, समुद्री सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि पिछले 24 घंटों में कोई समुद्री घटना सामने नहीं आई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास मौजूद 22 भारतीय जहाज और सभी नाविक सुरक्षित हैं। गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार की हलचल का असर वैश्विक बाजार पर तुरंत पड़ता है। ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत सरकार संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है। एक ओर वैश्विक तेल कीमतों में उछाल का दबाव है, तो दूसरी ओर आम जनता को राहत देना भी प्राथमिकता है। प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सामान्य पेट्रोल के दाम स्थिर रखना इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

