ईरान-इजराइल जंग के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। आज, शुक्रवार को सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य कर दी गई है। माना जा रहा है कि इस कदम से फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी टल जाएगी और आम उपभोक्ताओं को महंगाई के अतिरिक्त बोझ से राहत मिलेगी। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से देश के कई हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की पैनिक बाइंग देखी जा रही थी। वैश्विक हालात को देखते हुए लोगों को आशंका थी कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगने लगी थीं और कई राज्यों में आपूर्ति पर दबाव बढ़ने लगा था। ऐसे में केंद्र सरकार ने बाजार को स्थिर करने और घबराहट को कम करने के लिए यह कदम उठाया है। जानकारों के अनुसार, ईरान-इजराइल संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। संघर्ष से पहले कच्चा तेल करीब 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, जो अब बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है। इस तेज उछाल का सीधा असर तेल विपणन कंपनियों की लागत पर पड़ रहा था। यदि सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती नहीं करती तो कंपनियां घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा सकती थीं, जिससे आम जनता पर सीधा असर पड़ता। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू बाजार पर तुरंत दिखाई देता है। संघर्ष से पहले भारत अपने कच्चे तेल के आयात का लगभग 12 से 15 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया के उस महत्वपूर्ण गलियारे के माध्यम से प्राप्त करता था, जो फिलहाल तनाव के कारण अस्थिर बना हुआ है। इससे आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ी है और बाजार में दबाव बना हुआ है। केंद्र सरकार के इस फैसले से तेल विपणन कंपनियों पर लागत का बोझ कम होने की उम्मीद है। इससे कंपनियों को कीमतें स्थिर रखने में मदद मिलेगी। यदि एक्साइज ड्यूटी में कटौती नहीं होती तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 8 से 12 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती थी। इससे परिवहन लागत बढ़ती और उसका असर खाद्य पदार्थों समेत रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ता। इस बीच रूस की कंपनी नायरा एनर्जी ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी की है। हालांकि सरकारी तेल कंपनियों ने अभी तक खुदरा कीमतों में बदलाव नहीं किया है। फिलहाल केवल प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अन्य कंपनियां भी कीमतें स्थिर रखेंगी। केंद्र सरकार ने केवल एक्साइज ड्यूटी में कटौती ही नहीं की है, बल्कि ईंधन निर्यात से जुड़े नियमों को भी सख्त कर दिया है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर पहले दी जा रही व्यापक उत्पाद शुल्क छूट को वापस ले लिया है। इस कदम का मकसद घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और कीमतों को नियंत्रित रखना है।
निर्यात नियम सख्त, घरेलू बाजार को प्राथमिकता
संशोधित व्यवस्था के तहत अब ईंधन निर्यात से संबंधित लाभ केवल कुछ स्पष्ट रूप से परिभाषित श्रेणियों तक ही सीमित कर दिए गए हैं। इससे कंपनियों के लिए बड़े पैमाने पर निर्यात करना पहले की तुलना में कम आकर्षक होगा और घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह कदम संतुलित नीति का संकेत देता है। एक तरफ सरकार ने कंपनियों पर लागत का दबाव कम किया है, वहीं दूसरी तरफ निर्यात पर सख्ती कर घरेलू आपूर्ति मजबूत करने की कोशिश की है। इससे कीमतों में अचानक उछाल की संभावना कम होगी और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी। सरकार पहले ही यह साफ कर चुकी है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घबराने की जरूरत नहीं है। तेल कंपनियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सप्लाई चेन को सुचारू रखें और किसी भी क्षेत्र में कृत्रिम कमी न होने दें। राज्यों के साथ भी समन्वय बढ़ाया गया है ताकि वितरण व्यवस्था पर नजर रखी जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान-इजराइल तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार आगे भी ऐसे कदम उठा सकती है। फिलहाल एक्साइज ड्यूटी में कटौती से सरकार ने संकेत दिया है कि वह महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करने को तैयार है। कुल मिलाकर, केंद्र सरकार के इस फैसले से आम लोगों को तुरंत राहत मिलने की उम्मीद है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी फिलहाल टल गई है, जिससे परिवहन लागत स्थिर रहेगी और महंगाई पर भी दबाव कम पड़ेगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सरकार का यह कदम बाजार को स्थिर रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

