करीब ढाई दशक के इंतजार के बाद शनिवार को जेवर से देश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह करीब 11:30 बजे गौतम बुद्ध नगर के जेवर पहुंचकर नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री टर्मिनल भवन का निरीक्षण करेंगे और परियोजना की प्रगति की जानकारी लेंगे। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे, जिसमें वे एयरपोर्ट के आर्थिक, औद्योगिक और क्षेत्रीय विकास में योगदान को लेकर अपनी बात रखेंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी आधारभूत परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस एयरपोर्ट का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती हवाई यातायात की मांग को पूरा करना है। अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में एयरपोर्ट की यात्री क्षमता 1.2 करोड़ प्रतिवर्ष होगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 7 करोड़ यात्रियों तक ले जाने की योजना है। यह एयरपोर्ट न सिर्फ दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दबाव कम करेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के यात्रियों के लिए भी सुविधाजनक विकल्प बनेगा। उद्घाटन समारोह को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और पूरे क्षेत्र को कई जोन में बांटा गया है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। भारी भीड़ को देखते हुए यातायात प्रबंधन की विशेष योजना लागू की गई है। यमुना एक्सप्रेसवे और आसपास के मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही सीमित कर दी गई है, ताकि कार्यक्रम में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
एशिया के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की खासियतें, 24 घंटे उड़ान संचालन की सुविधा
नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को आधुनिक तकनीक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पहले चरण में 3,900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है, जो बड़े और आधुनिक विमानों के संचालन में सक्षम होगा। एयरपोर्ट पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और उन्नत एयरफील्ड लाइटिंग लगाई गई है, जिससे हर मौसम में 24 घंटे उड़ान संचालन संभव होगा। इसके अलावा टर्मिनल भवन को ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है। एयरपोर्ट को मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है। यह यमुना एक्सप्रेसवे पर स्थित है और भविष्य में इसे मेट्रो, हाई-स्पीड रेल और क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, आगरा और आसपास के शहरों से पहुंच आसान होगी। कार्गो संचालन के लिए भी यहां विशेष सुविधा विकसित की गई है। शुरुआती चरण में 2.5 लाख मीट्रिक टन कार्गो क्षमता होगी, जिसे आगे बढ़ाकर 18 लाख मीट्रिक टन तक किया जा सकता है। इससे निर्यात-आयात गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। एयरपोर्ट की डिजाइन भारतीय सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित है। टर्मिनल भवन में घाटों और पारंपरिक स्थापत्य शैली की झलक देखने को मिलेगी। साथ ही, इसे शून्य-उत्सर्जन लक्ष्य के साथ विकसित किया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है। अधिकारियों का दावा है कि यह एयरपोर्ट भविष्य में दुनिया के सबसे पर्यावरण-अनुकूल हवाई अड्डों में शामिल होगा।
एनसीआर और पश्चिमी यूपी के विकास को मिलेगी रफ्तार, निवेश और रोजगार के नए अवसर
नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को क्षेत्रीय विकास के लिहाज से गेम-चेंजर माना जा रहा है। एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली एयरपोर्ट पर बढ़ता दबाव कम होगा और एनसीआर में हवाई यातायात का संतुलन बनेगा। इससे खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शहरों को सीधा फायदा मिलेगा। मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, मथुरा और आगरा जैसे शहरों के लोगों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए दिल्ली जाने की जरूरत कम होगी। इसके अलावा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि आगरा और मथुरा जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल इस एयरपोर्ट से सीधे जुड़ेंगे। औद्योगिक विकास की दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एयरपोर्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग, औद्योगिक पार्क और व्यावसायिक केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। इससे बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। राज्य सरकार का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र एयरोसिटी के रूप में विकसित होगा, जहां होटल, कन्वेंशन सेंटर और व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी। यह एयरपोर्ट उत्तर भारत के एविएशन नेटवर्क को मजबूत करेगा और भारत को वैश्विक एयर ट्रांसपोर्ट मानचित्र पर नई पहचान देगा। पहले चरण में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों की शुरुआत की तैयारी है। उद्घाटन के साथ ही यह परियोजना संचालन की दिशा में बड़ा कदम रखेगी और एनसीआर को नई उड़ान देने का सपना साकार होगा।

