हवाई यात्रा अब पहले से ज्यादा सुविधाजनक और किफायती होने वाली है। विमानन नियामक डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए एयरलाइंस के लिए नया नियम लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत 20 अप्रैल से हर फ्लाइट में कम से कम 60 प्रतिशत सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध करानी होंगी। साथ ही एयरलाइंस को सीट आवंटन की पारदर्शी नीति अपनाने और एक ही बुकिंग वाले यात्रियों को यथासंभव साथ बैठाने का निर्देश दिया गया है। यह कदम खासतौर पर उन यात्रियों के लिए फायदेमंद होगा, जिन्हें सीट चुनने के लिए अतिरिक्त पैसे देने पड़ते थे। DGCA ने 20 मार्च को संशोधित एयर ट्रांसपोर्ट सर्कुलर जारी किया है, जो 20 अप्रैल से लागू होगा। इस सर्कुलर के बाद एयरलाइंस को अपनी सीट चयन व्यवस्था में बदलाव करना होगा। अभी तक अधिकतर एयरलाइंस सीमित सीटें ही मुफ्त में चुनने की अनुमति देती थीं, जबकि बाकी सीटों के लिए यात्रियों से अतिरिक्त शुल्क लिया जाता था। नए नियम के बाद यात्रियों को बिना शुल्क के सीट चुनने के ज्यादा विकल्प मिलेंगे। सर्कुलर में स्पष्ट कहा गया है कि एयरलाइंस को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी फ्लाइट में कम से कम 60 प्रतिशत सीटें मुफ्त दी जाएं। इसके अलावा एयरलाइंस को अपनी बुकिंग वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर मुफ्त सीटों की उपलब्धता और लागू शर्तों की जानकारी साफ तौर पर दिखानी होगी। इससे यात्रियों को पहले से पता रहेगा कि कौन-सी सीट बिना शुल्क के है और किन सीटों के लिए भुगतान करना होगा। अब तक यात्रियों को सीट चयन के लिए अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता था। खासकर विंडो सीट, आगे की पंक्ति की सीटें और ज्यादा लेगरूम वाली सीटों के लिए अलग शुल्क लिया जाता था। कई एयरलाइंस सीट चयन के लिए 200 रुपये से लेकर 2,100 रुपये तक चार्ज करती थीं। परिवार या समूह में यात्रा करने वाले यात्रियों को एक साथ बैठने के लिए अक्सर पहले से सीटें चुननी पड़ती थीं, जिससे उनका खर्च और बढ़ जाता था।
एक ही बुकिंग वाले यात्रियों को साथ बैठाने पर जोर
DGCA ने अपने सर्कुलर में यह भी कहा है कि एक ही PNR (पैसेंजर नेम रिकॉर्ड) के तहत बुक किए गए यात्रियों को, जहां तक संभव हो, एक साथ बैठाया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि परिवार, दोस्तों या समूह में यात्रा करने वाले यात्रियों को अलग-अलग सीटों पर बैठाने से बचा जाएगा। एयरलाइंस को कोशिश करनी होगी कि ऐसे यात्रियों को एक ही पंक्ति या पास-पास सीटें दी जाएं।
यह नियम खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा करने वालों के लिए राहत भरा होगा। पहले कई बार ऐसा होता था कि सीट चयन के लिए भुगतान नहीं करने पर यात्रियों को अलग-अलग सीटें मिलती थीं। इससे यात्रा के दौरान असुविधा होती थी। अब एयरलाइंस को ऐसे मामलों में यात्रियों को साथ बैठाने को प्राथमिकता देनी होगी। DGCA के एक अधिकारी ने बताया कि एयरलाइंस इस नए नियम को लागू करने की तैयारी कर रही हैं। इसके लिए सीट आवंटन प्रणाली में तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं ताकि मुफ्त सीटों की संख्या बढ़ाई जा सके। इससे यात्रियों को टिकट बुकिंग के समय ज्यादा विकल्प मिलेंगे और अतिरिक्त शुल्क से राहत मिलेगी। वर्तमान में कई एयरलाइंस केवल करीब 20 प्रतिशत सीटें ही मुफ्त में उपलब्ध कराती हैं, जबकि बाकी सीटों के लिए अलग से भुगतान करना पड़ता है। यह शुल्क सीट के प्रकार, फ्लाइट की अवधि और मांग के आधार पर तय होता है। नए नियम के बाद यह प्रतिशत बढ़ाकर 60 कर दिया जाएगा, जिससे यात्रियों का खर्च कम होगा। यह फैसला यात्रियों के हित में है और इससे एयरलाइन उद्योग में पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी और एयरलाइंस को अपनी सेवाएं बेहतर करनी होंगी। साथ ही यात्रियों को टिकट बुकिंग के समय अतिरिक्त शुल्क के दबाव से राहत मिलेगी। यह बदलाव खासतौर पर घरेलू यात्रियों के लिए अहम माना जा रहा है, जहां कम दूरी की उड़ानों में सीट चयन शुल्क कुल टिकट कीमत का बड़ा हिस्सा बन जाता था। अब यात्रियों को टिकट के अलावा सीट चयन के लिए अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा, जिससे हवाई यात्रा और किफायती हो सकती है। 20 अप्रैल से लागू होने वाले इस नियम के बाद उम्मीद है कि यात्रियों का अनुभव बेहतर होगा। पारदर्शी सीट आवंटन नीति, मुफ्त सीटों की बढ़ी संख्या और एक साथ बैठाने की व्यवस्था से यात्रियों को बड़ी राहत मिलने जा रही है।

