कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चले आ रहे कावेरी नदी जल विवाद का असर अब मनोरंजन जगत पर भी दिखाई देने लगा है। तमिल सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता और तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) प्रमुख थलपति विजय की हालिया फिल्म ‘जन नायकन’ राज्य में राजनीतिक और सामाजिक विवादों के केंद्र में आ गई है। कावेरी जल बंटवारे को लेकर बढ़ते तनाव के बीच कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों में किसानों और कन्नड़ समर्थक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं, जिसका सीधा असर फिल्म के प्रदर्शन पर पड़ा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई सिनेमाघरों ने एहतियातन फिल्म के शो रद्द कर दिए हैं, जबकि कुछ स्थानों पर विजय के पोस्टर और बैनर तक हटा दिए गए हैं। दरअसल, कावेरी नदी के पानी को तमिलनाडु के लिए छोड़े जाने के मुद्दे पर कर्नाटक में समय-समय पर विरोध होता रहा है। हाल के दिनों में यह विवाद फिर से राजनीतिक और जनभावनाओं का विषय बन गया है। इसी बीच थलपति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ सिनेमाघरों में पहुंची। हालांकि फिल्म का कथानक सीधे तौर पर कावेरी विवाद से जुड़ा नहीं है, लेकिन तमिलनाडु के एक प्रमुख अभिनेता और राजनीतिक चेहरे से जुड़े होने के कारण यह विरोध की चपेट में आ गई।
23 जुलाई को रिलीज हुई ‘जन नायकन’ को कर्नाटक में व्यापक स्तर पर प्रदर्शित किया गया था। राज्यभर के लगभग 125 से 150 सिनेमाघरों में फिल्म रिलीज हुई, जिनमें बड़ी संख्या में सिंगल स्क्रीन थिएटर और मल्टीप्लेक्स शामिल थे। शुरुआती दिनों में फिल्म को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद भी मिला, लेकिन जैसे-जैसे कावेरी विवाद को लेकर आंदोलन तेज हुआ, सिनेमाघर संचालकों की चिंता बढ़ने लगी। कई थिएटर मालिकों का कहना है कि वे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या कानून-व्यवस्था की समस्या से बचना चाहते हैं। इसी वजह से कई स्थानों पर स्वेच्छा से फिल्म की स्क्रीनिंग रोकने का निर्णय लिया गया। कुछ थिएटरों ने अपने परिसर से विजय के पोस्टर, बैनर और कट-आउट भी हटा दिए ताकि विरोध प्रदर्शन करने वाले समूहों के साथ किसी प्रकार का टकराव न हो।
बेंगलुरु सहित कई प्रमुख शहरों में स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी सतर्क नजर आई। कुछ थिएटर प्रबंधन को सुरक्षा संबंधी सलाह दी गई, जिसके बाद उन्होंने फिल्म के शो स्थगित कर दिए। राजधानी बेंगलुरु के चर्चित उर्वशी थिएटर में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली। यहां पुलिस की सलाह के बाद ‘जन नायकन’ की स्क्रीनिंग रोक दी गई और थिएटर परिसर से फिल्म से जुड़े प्रचार सामग्री हटा दी गई।
विरोध के बीच सिनेमाघरों ने बदली रणनीति, कन्नड़ फिल्मों को मिली प्राथमिकता
कावेरी विवाद के कारण पैदा हुए तनावपूर्ण माहौल में कई सिनेमाघरों ने अपनी प्रदर्शन नीति में अस्थायी बदलाव किया है। कुछ थिएटरों ने तय शो रद्द कर उनकी जगह स्थानीय कन्नड़ फिल्मों को प्रदर्शित करना शुरू कर दिया। उर्वशी थिएटर में ‘जन नायकन’ के निर्धारित शो की जगह कन्नड़ फिल्म ‘करावलि’ दिखाई गई। थिएटर प्रबंधन का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में स्थानीय भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाना आवश्यक था।
किसान संगठनों और कन्नड़ समर्थक समूहों का कहना है कि कावेरी नदी का पानी कर्नाटक के किसानों के लिए जीवनरेखा है और राज्य के हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती।
हालांकि इन संगठनों ने फिल्म की कहानी या निर्माण पर सीधे सवाल नहीं उठाए हैं, लेकिन उनका विरोध तमिलनाडु से जुड़े प्रतीकों और प्रमुख चेहरों के खिलाफ दिखाई दे रहा है। इसी कारण थलपति विजय की फिल्म को भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। फिल्म उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि क्षेत्रीय विवादों का असर फिल्मों पर पड़ना नई बात नहीं है, लेकिन इससे कला और व्यापार दोनों प्रभावित होते हैं। कर्नाटक तमिल फिल्मों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार माना जाता है और वहां स्क्रीनिंग रुकने से निर्माताओं तथा वितरकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
फिलहाल राज्य के विभिन्न हिस्सों में हालात पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। पुलिस और स्थानीय अधिकारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। वहीं फिल्म के निर्माता और वितरक भी परिस्थितियों के सामान्य होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि सिनेमाघरों में फिल्म का प्रदर्शन दोबारा सुचारु रूप से शुरू हो सके।
कावेरी जल विवाद वर्षों पुराना है और समय-समय पर दोनों राज्यों के बीच तनाव का कारण बनता रहा है। इस बार इसकी आंच सिनेमा जगत तक पहुंच गई है, जहां एक फिल्म राजनीतिक और क्षेत्रीय भावनाओं के बीच फंसती नजर आ रही है। आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर फिल्म के व्यावसायिक प्रदर्शन के साथ-साथ दोनों राज्यों के सामाजिक और राजनीतिक माहौल की भी नजर रहेगी।

