एक पुलिस मुठभेड़, एक लापता नाबालिग लड़की और न्याय को लेकर दो पुलिस अधिकारियों के बीच बढ़ता टकराव। कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, सवाल सिर्फ अपराधी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पुलिस की कार्रवाई, कानून की सीमाओं और जवाबदेही तक पहुंच जाता है। मेघना गुलजार की आगामी फिल्म ‘दायरा’ का ट्रेलर इसी तनाव और जटिलता की झलक पेश करता है। फिल्म में करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन पुलिस अधिकारियों की भूमिका में नजर आ रहे हैं, लेकिन दोनों का कानून और न्याय को देखने का नजरिया बिल्कुल अलग है। करीना कपूर खान फिल्म में डीसीपी अजूनी कोहली का किरदार निभा रही हैं, जबकि पृथ्वीराज सुकुमारन डीसीपी रमन कुमार की भूमिका में हैं। ट्रेलर की शुरुआत एक विवादित पुलिस मुठभेड़ से जुड़े मामले से होती है। इस मामले को लेकर दोनों अधिकारियों की सोच एक-दूसरे से अलग दिखाई देती है। एक तरफ पुलिस कार्रवाई को परिस्थितियों और ड्यूटी के नजरिए से देखने की कोशिश होती है, तो दूसरी तरफ जांच के दौरान सामने आने वाले सवाल कार्रवाई की वैधता और जवाबदेही पर केंद्रित होते जाते हैं।
फिल्म का सबसे अहम पहलू यही टकराव है। दोनों अधिकारी एक ही व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन कानून को लागू करने और न्याय सुनिश्चित करने के उनके तरीके अलग हैं। शुरुआत में यह मतभेद एक मामले तक सीमित दिखाई देता है, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, दोनों के बीच तनाव गहराता जाता है। ट्रेलर यह संकेत देता है कि मामला केवल किसी एक आरोपी या एक पुलिस मुठभेड़ की सच्चाई तलाशने का नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाने का है, जिसमें पुलिस कार्रवाई और नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। कहानी उस समय और गंभीर मोड़ लेती है, जब एक परिवार अपनी लापता बेटी की तलाश में पुलिस अधिकारियों से मदद मांगता है। जांच आगे बढ़ने पर ऐसे सुराग सामने आते हैं, जो मामले को पहले से कहीं ज्यादा पेचीदा बना देते हैं। पता चलता है कि एक आरोपी कथित तौर पर पिछले दो वर्षों से इसी तरह की गतिविधियों में सक्रिय था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ता है और पुलिस के सामने अपराध की कड़ियों को जोड़ने के साथ-साथ अपनी पिछली कार्रवाई की भी पड़ताल करने की चुनौती खड़ी हो जाती है।
ट्रेलर में नाबालिगों से जुड़े गंभीर अपराधों को लेकर कानून और न्याय व्यवस्था के सामने खड़े सवालों को भी प्रमुखता से दिखाया गया है। कहानी का एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि किसी गंभीर अपराध में आरोपी नाबालिग है, तो उसके साथ कानून का व्यवहार किस सीमा तक अलग होना चाहिए। बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर अपराधों के मामलों में नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों और पीड़ितों को न्याय दिलाने की जरूरत के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, यह बहस फिल्म के केंद्र में दिखाई देती है।
यही वजह है कि ‘दायरा’ का ट्रेलर केवल एक पुलिस अपराध कथा जैसा नजर नहीं आता। इसमें अपराध की जांच के साथ-साथ व्यवस्था के भीतर मौजूद उन सवालों को भी सामने लाया गया है, जिनका जवाब आसान नहीं होता। करीना और पृथ्वीराज के किरदारों के बीच होने वाला टकराव इसी बहस को आगे बढ़ाता है। दोनों अधिकारी अपने-अपने तरीके से सही दिखाई देते हैं, लेकिन उनके फैसले और प्राथमिकताएं एक-दूसरे से लगातार टकराती रहती हैं। ट्रेलर में करीना का किरदार बेहद दृढ़ और सवाल पूछने वाले पुलिस अधिकारी के रूप में नजर आता है। वहीं पृथ्वीराज का किरदार पुलिस व्यवस्था, कार्रवाई और अपने अनुभव के आधार पर मामले को देखने की कोशिश करता दिखाई देता है। दोनों के बीच संवाद और टकराव फिल्म की गंभीरता को बढ़ाते हैं। खास बात यह है कि यहां संघर्ष केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो अलग-अलग सोच का है।
मुठभेड़ से शुरू हुई कहानी पहुंचेगी न्याय और जवाबदेही के सवाल तक
‘दायरा’ की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। दोनों अधिकारियों के बीच असहमति धीरे-धीरे पुलिस प्रक्रिया और व्यक्तिगत जवाबदेही तक पहुंचती है। वे एक-दूसरे के फैसलों पर सवाल उठाते हैं और यह समझने की कोशिश करते हैं कि एक पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी की वास्तविक सीमा क्या होनी चाहिए। क्या ड्यूटी निभाने के नाम पर हर कार्रवाई को सही ठहराया जा सकता है? क्या किसी अपराध की गंभीरता पुलिस को कानून की निर्धारित सीमाओं से आगे जाने का अधिकार देती है? और यदि किसी कार्रवाई पर सवाल उठते हैं तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? फिल्म इन सवालों को कहानी के जरिए सामने लाने की कोशिश करती है। मेघना गुलजार के निर्देशन में बनी यह फिल्म सच्ची घटनाओं से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म की कहानी यश केसवानी, सीमा अग्रवाल और मेघना गुलजार ने लिखी है। ट्रेलर में जिस तरह एक अपराध के बाद जनता के आक्रोश, पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया को आपस में जोड़कर दिखाया गया है, उससे साफ है कि फिल्म केवल अपराधी की तलाश तक सीमित नहीं रहने वाली।
कहानी में एक तरफ अपराध की गंभीरता है, तो दूसरी तरफ पुलिस की भूमिका और न्यायिक प्रक्रिया का दबाव। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, कई परतें खुलती हैं और अधिकारियों को ऐसे सवालों का सामना करना पड़ता है, जिनसे बचना आसान नहीं है। ट्रेलर का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहता है और दर्शकों को यह जानने की उत्सुकता रहती है कि आखिर सच्चाई क्या है और किसकी कार्रवाई सही है। फिल्म में करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन के अलावा जितेंद्र जोशी, क्षिति जोग, कंवलजीत सिंह, संदीप कुलकर्णी और तृप्ति खामकर भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। कलाकारों की मौजूदगी कहानी के अलग-अलग पहलुओं को मजबूत करती नजर आती है। करीना और पृथ्वीराज की जोड़ी को इस बार बिल्कुल अलग अंदाज में देखा जाएगा। दोनों एक-दूसरे के सामने खड़े पुलिस अधिकारियों की भूमिका में हैं और कहानी का बड़ा हिस्सा उनके विचारों और फैसलों के टकराव के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई देता है। एक अधिकारी जहां कार्रवाई और व्यवस्था के पक्ष को सामने रखता है, वहीं दूसरा न्याय और जवाबदेही के सवालों को प्राथमिकता देता नजर आता है।
‘दायरा’ का ट्रेलर यह संकेत देता है कि फिल्म अपराध की जांच के बहाने पुलिस व्यवस्था, कानून और न्याय के बीच मौजूद जटिल रिश्ते को सामने लाएगी। खासतौर पर नाबालिगों से जुड़े अपराध, पुलिस मुठभेड़ और गंभीर अपराधों में कानून की भूमिका जैसे मुद्दे कहानी को संवेदनशील और गंभीर बनाते हैं। मेघना गुलजार इससे पहले भी संवेदनशील और वास्तविक घटनाओं से जुड़े विषयों को पर्दे पर अलग अंदाज में पेश कर चुकी हैं। ऐसे में ‘दायरा’ से भी एक गंभीर और प्रभावशाली कहानी की उम्मीद की जा रही है। फिल्म का ट्रेलर दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ाता है और अब निगाहें इस बात पर हैं कि पूरी कहानी में करीना और पृथ्वीराज के किरदारों के बीच यह टकराव किस मोड़ तक पहुंचता है। ‘दायरा’ 18 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म का ट्रेलर जिस तरह कानून, न्याय, अपराध और पुलिस की जवाबदेही के सवालों को सामने रखता है, उससे यह साफ है कि फिल्म सिर्फ रोमांच पैदा करने की कोशिश नहीं करेगी, बल्कि दर्शकों को कई असहज और महत्वपूर्ण सवालों पर सोचने के लिए भी मजबूर कर सकती है।

