आध्यात्मिक संत और हनुमान भक्त नीब करौरी बाबा के जीवन, उनकी साधना और मानव सेवा के संदेश को पर्दे पर उतारने वाली फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से कहीं आगे निकलते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। शुरुआत में धीमी रफ्तार से आगे बढ़ी इस फिल्म ने अब घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 150 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। फिल्म की कमाई का यह मुकाम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसकी कहानी किसी पारंपरिक व्यावसायिक मसाले के बजाय आध्यात्मिक यात्रा, आत्मखोज, सेवा और करुणा जैसे विषयों पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है। फिल्म की कहानी एक ऐसे युवा के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो निजी दुख और जीवन में आए गहरे संकट के बीच ईश्वर की तलाश शुरू करता है। यही तलाश धीरे-धीरे उसे आत्मज्ञान और आध्यात्मिक अनुभव की ऐसी राह पर ले जाती है, जहां उसके जीवन का उद्देश्य ही बदल जाता है। ‘हनुमान अंश’ में मुख्य भूमिका निभाने वाले शोभिनव सत्या ने लक्ष्मीनारायण का किरदार निभाया है। कहानी की शुरुआत एक ऐसे युवक से होती है, जो अपनी मां को खोने के बाद भीतर से टूट जाता है। मां की मृत्यु उसके सामने जीवन और मृत्यु से जुड़े कई सवाल खड़े कर देती है। वह यह समझना चाहता है कि जीवन का वास्तविक अर्थ क्या है, मनुष्य को दुख क्यों मिलता है और मृत्यु के बाद आखिर क्या बचता है।
इन सवालों का जवाब पाने के लिए लक्ष्मीनारायण घर की सीमाओं से बाहर निकलकर आध्यात्मिक यात्रा पर निकल पड़ता है। उत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में उसकी यात्रा केवल स्थान बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उसके भीतर चल रहे बदलाव को भी दिखाती है। रास्ते में उसे अलग-अलग तरह के लोग, अनुभव और आध्यात्मिक विचार मिलते हैं, जो उसके सोचने का नजरिया बदलते जाते हैं। यही यात्रा आगे चलकर उसे उस व्यक्तित्व की ओर ले जाती है, जिसे श्रद्धालु आज नीब करौरी बाबा के नाम से जानते हैं। फिल्म उनके जीवन को केवल एक संत की जीवनी के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश नहीं करती, बल्कि उनकी शिक्षाओं और मानवीय दृष्टिकोण को कहानी के केंद्र में रखती है।
नीब करौरी बाबा को उनके अनुयायी प्रेम, सेवा और करुणा के संदेश के लिए याद करते हैं। फिल्म भी इन्हीं विचारों को प्रमुखता देती है। कहानी यह बताने का प्रयास करती है कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों की सेवा, दूसरे मनुष्यों के प्रति प्रेम और दुख में साथ खड़े होने में भी उसका गहरा अर्थ है। फिल्म की खास बात यह है कि इसमें आध्यात्मिकता को किसी उपदेश की तरह पेश करने के बजाय एक युवा की व्यक्तिगत यात्रा के माध्यम से सामने लाया गया है। दर्शक लक्ष्मीनारायण के दुख, उसके सवालों और उसकी तलाश के साथ आगे बढ़ते हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उसकी बाहरी यात्रा आंतरिक परिवर्तन में बदलती जाती है।
बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म की यात्रा कुछ इसी तरह रही। रिलीज के शुरुआती दिनों में ‘हनुमान अंश’ को दर्शकों का वैसा जोरदार रिस्पॉन्स नहीं मिला, जिसकी उम्मीद निर्माताओं ने की थी। पहले दो सप्ताह में फिल्म की कमाई काफी धीमी रही। सिनेमाघरों में इसकी शुरुआत सामान्य रही और शुरुआती दौर में ऐसा नहीं लग रहा था कि यह फिल्म आगे चलकर बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल कर पाएगी। लेकिन धीरे-धीरे फिल्म को लेकर दर्शकों की चर्चा बढ़ने लगी। जिन लोगों ने फिल्म देखी, उनमें से कई ने इसकी कहानी, आध्यात्मिक विषय और प्रस्तुति को पसंद किया।
इसके बाद फिल्म की कमाई में लगातार सुधार देखने को मिला। सकारात्मक चर्चा ने फिल्म को नई दर्शक संख्या दिलाई और यही इसकी कमाई की रफ्तार बढ़ने का बड़ा कारण बना। अब फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 156 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली है। बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों पर नजर रखने वाली वेबसाइट सैकनिल्क के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ की घरेलू कमाई 156.63 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। सात अगस्त को रिलीज हुई फिल्म के लिए यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शुरुआत में इसकी रफ्तार काफी धीमी थी।
सितारों की मौजूदगी से लेकर कहानी तक, ‘हनुमान अंश’ में क्या है खास
फिल्म में शोभिनव सत्या के अलावा विहान शेडगे, चंदन के. आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी, गुलशन पांडेय और भगवानदास सहित कई कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए हैं। कलाकारों ने कहानी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण इसका केंद्रीय किरदार और उसकी आध्यात्मिक यात्रा है। लक्ष्मीनारायण का किरदार फिल्म को एक भावनात्मक आधार देता है। शुरुआत में वह एक ऐसा युवक है जो अपनी मां की मौत के बाद जवाब तलाश रहा है। उसके भीतर का खालीपन उसे सामान्य जीवन से दूर ले जाता है। वह अपने सवालों का उत्तर किताबों या सामान्य बातचीत में नहीं, बल्कि अनुभव के जरिए खोजने निकलता है। यात्रा के दौरान उसके सामने आने वाले अनुभव उसके व्यक्तित्व को धीरे-धीरे बदलते हैं। फिल्म इसी परिवर्तन को नीब करौरी बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं से जोड़ती है। इस वजह से कहानी केवल एक व्यक्ति के संत बनने की कथा नहीं रह जाती, बल्कि यह आत्मखोज और जीवन के उद्देश्य को समझने की कहानी बन जाती है।
फिल्म में प्रेम और सेवा को भी विशेष महत्व दिया गया है। नीब करौरी बाबा से जुड़े श्रद्धालुओं के बीच उनकी सबसे प्रमुख शिक्षाओं में सेवा और मानवता का भाव माना जाता है। ‘हनुमान अंश’ इन्हीं विचारों को कहानी के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश करती है। बॉक्स ऑफिस पर 150 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई फिल्म के लिए इसलिए भी बड़ी उपलब्धि है क्योंकि आध्यात्मिक विषयों पर बनी फिल्मों का बाजार पारंपरिक मनोरंजन फिल्मों से अलग होता है। इसके बावजूद ‘हनुमान अंश’ ने दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई। खास तौर पर सकारात्मक चर्चा ने फिल्म को शुरुआती धीमी कमाई से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फिल्म की सफलता यह भी दिखाती है कि दर्शक केवल बड़े बजट और पारंपरिक मनोरंजन वाली कहानियों तक सीमित नहीं हैं। यदि कहानी भावनात्मक रूप से दर्शकों से जुड़ती है और उसमें कोई ऐसा संदेश है, जिसे लोग अपने जीवन से जोड़ सकें, तो वह फिल्म लंबे समय तक सिनेमाघरों में दर्शक खींच सकती है।
‘हनुमान अंश’ की कहानी में दुख से शुरुआत होती है और आध्यात्मिक खोज तक पहुंचती है। यही इसका भावनात्मक आधार है। लक्ष्मीनारायण की यात्रा के जरिए फिल्म जीवन के उन सवालों को सामने रखती है, जिनसे कभी न कभी हर व्यक्ति रूबरू होता है, जीवन का उद्देश्य क्या है, दुख का अर्थ क्या है और इंसान अपने भीतर शांति कैसे पा सकता है। सात अगस्त को सिनेमाघरों में पहुंची इस फिल्म ने पहले दो सप्ताह में भले ही धीमी शुरुआत की, लेकिन इसके बाद दर्शकों की चर्चा ने इसकी कमाई को गति दी। अब 156.63 करोड़ रुपये का घरेलू कारोबार फिल्म की उस यात्रा का परिणाम है, जिसमें शुरुआती संघर्ष के बाद दर्शकों का समर्थन लगातार बढ़ता गया।
नीब करौरी बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं से प्रेरित यह फिल्म अब बॉक्स ऑफिस के साथ-साथ दर्शकों के बीच चर्चा का विषय भी बनी हुई है। 150 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करना ‘हनुमान अंश’ के लिए केवल एक व्यावसायिक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह संकेत भी है कि आध्यात्मिक और मानवीय कहानियों के लिए भी बड़े पर्दे पर दर्शकों की मजबूत रुचि मौजूद है।

