हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपने दमदार अभिनय तथा प्रभावशाली खलनायक भूमिकाओं के लिए पहचान बनाने वाले वरिष्ठ अभिनेता प्रदीप रावत का मंगलवार शाम 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। बॉलीवुड, टेलीविजन और दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग से जुड़े कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया। प्रदीप रावत ने अपने लंबे अभिनय करियर में अनेक यादगार किरदार निभाए। उन्होंने ‘लगान’, ‘गजनी’, ‘इंसाफ’, ‘सरफरोश’, ‘आवारापन’ और हाल में रिलीज हुई ‘छावा’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का ऐसा प्रभाव छोड़ा कि दर्शकों के बीच उनकी अलग पहचान बन गई। खासकर आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘गजनी’ में निभाया गया उनका खलनायक चरित्र आज भी दर्शकों के जेहन में ताजा है।
अभिनेता के निधन की जानकारी उनके साथ फिल्म ‘लगान’ में काम कर चुके अभिनेता यशपाल शर्मा ने साझा की। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों और फिल्म जगत के लोगों ने शोक व्यक्त करना शुरू कर दिया। कई कलाकारों ने कहा कि भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा अभिनेता खो दिया है, जिसने हर भूमिका में अपनी गहरी छाप छोड़ी।
जानकारी के अनुसार प्रदीप रावत ने मुंबई के भिवंडी क्षेत्र स्थित एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने बताया कि अभिनेता पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार थे और अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। उन्होंने बताया कि करीब चार वर्ष पहले प्रदीप रावत को कैंसर हुआ था, लेकिन उस समय उन्होंने साहस और इच्छाशक्ति के बल पर बीमारी को मात दे दी थी। हालांकि लगभग डेढ़ महीने पहले कैंसर दोबारा लौट आया। इसके बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। चिकित्सकों की टीम लगातार उनका इलाज कर रही थी, लेकिन स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया। सिद्धार्थ तिवारी के अनुसार बीमारी के दौरान उनके प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगे थे। इसी बीच उन्हें वायरल बुखार भी हो गया, जिससे उनकी स्थिति और गंभीर हो गई।
उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन शरीर लगातार कमजोर होता गया। प्लेटलेट्स में गिरावट और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण उनकी हालत लगातार नाजुक बनी रही। अंततः मंगलवार शाम उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।प्रदीप रावत अपने पीछे पत्नी कल्याणी रावत और पुत्र विक्रमादित्य को छोड़ गए हैं। परिवार और करीबी रिश्तेदारों के लिए यह अपूरणीय क्षति है। बुधवार को उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जिसके बाद शाम चार बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके अंतिम संस्कार में फिल्म जगत से जुड़े कई कलाकारों और शुभचिंतकों के शामिल होने की संभावना है।
महाभारत से शुरू हुआ सफर, फिल्मों में बनाई अलग पहचान
प्रदीप रावत का अभिनय सफर बेहद प्रेरणादायक रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बी.आर. चोपड़ा के चर्चित धारावाहिक ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा की भूमिका निभाकर की थी। यह किरदार दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ और उन्हें घर-घर पहचान मिली। टेलीविजन से मिली इस सफलता ने उनके लिए फिल्मों के दरवाजे खोल दिए। फिल्मी करियर की शुरुआत उन्होंने वर्ष 1985 में डिंपल कपाड़िया अभिनीत फिल्म ‘ऐतबार’ से की थी। इसके बाद उन्होंने ‘मेरी जंग’, ‘आप के साथ’, ‘समुंदर’, ‘काश’, ‘इंसाफ’ और ‘मर मिटेंगे’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया। धीरे-धीरे उन्होंने खलनायक और चरित्र अभिनेता के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना ली।
हिंदी फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली और भोजपुरी सिनेमा में भी काम किया। दक्षिण भारतीय फिल्मों में उनके अभिनय को विशेष रूप से सराहा गया। तेलुगु फिल्म ‘सई’ सहित कई फिल्मों में उन्होंने ऐसे नकारात्मक किरदार निभाए, जिन्हें दर्शकों ने खूब पसंद किया। उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और सशक्त संवाद अदायगी ने उन्हें खलनायक की भूमिकाओं के लिए बेहद लोकप्रिय बना दिया। फिल्म ‘लगान’ में निभाया गया देवा का किरदार हो या ‘सरफरोश’ और ‘आवारापन’ जैसी फिल्मों में उनकी मौजूदगी, हर बार उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
हालांकि उन्हें सबसे अधिक लोकप्रियता ‘गजनी’ में निभाए गए खौफनाक विलेन के किरदार से मिली। इस फिल्म में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा था। अपने करियर के अंतिम दौर तक भी प्रदीप रावत सक्रिय रहे। उनकी आखिरी हिंदी फिल्म विक्की कौशल अभिनीत ‘छावा’ रही, जिसमें उन्होंने येसाजी कंक का किरदार निभाया था। उम्र बढ़ने के बावजूद अभिनय के प्रति उनका समर्पण कम नहीं हुआ और वे लगातार काम करते रहे।
प्रदीप रावत का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने चार दशक से अधिक लंबे करियर में सैकड़ों किरदारों को जीवंत किया और अपनी प्रतिभा के बल पर दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बनाई। उनके जाने से फिल्म जगत ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसकी पहचान केवल एक अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि समर्पण, मेहनत और बहुमुखी प्रतिभा के प्रतीक के रूप में भी की जाती थी। उनके निधन से बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय सिनेमा में शोक की लहर है तथा उनके प्रशंसक उन्हें हमेशा उनके यादगार किरदारों के माध्यम से याद करते रहेंगे।

